VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा-

0
4


VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'अब इससे बढ़ के भला इम्तेहान क्या होगा, हम तो कूचा-ए-क़ातिल से भी उतर आए'

माजिद देवबंदी

News18Hindi

Updated: February 13, 2018, 3:54 PM IST

Hindi.news18.com पर आप हर रोज़ कविताएं, शायरी, गज़लें और नज़्म सुनने का लुत्फ़ उठाते हैं. आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में सुनिए और पढ़िए माजिद देवबंदी के क़लाम.

पेश हैं, माजिद देवबंदी के क़लाम.

हर एक सम से हम हो के दर-बदर आए

कहीं बना न पाई तो अपने घर आएये बस्तियां भी हिकारत से देखती हैं हमें
न जाने कैसी बुलंदी से हम उतर आए

अब इससे बढ़ के भला इम्तेहान क्या होगा
हम तो कूचा-ए-क़ातिल से भी उतर आए

तेरे लबों पे मुहब्बत का जो तराना है
ख़ुदा करे तेरी आंखों में भी नज़र आए

ये बद-गुमान फ़ज़ाएं, ये फ़ासले कब तक
कभी वो बात करे मुझसे, मेरे घर आए

यहां किसी का शरीक-ए-सफ़र नहीं कोई
हर एक मोड़ पे बस रहनुमा नज़र आए

हम लोगों को सताने का मेयार एक है
चेहरे अलग-अलग से किरदार एक है

सच ये है, इस क़बीले में जीदार एक है
उस पार बे-शुमार हैं, इस पास एक है

बेयत लतब बदलते रहे करबला के साथ
अपनी जगह हुसैन का इनकार एक है

भटके हुए हैं हम तो ख़ुद अपनी ख़ताओं से
वरना हमारा क़ाफ़ला सालार एक है



Source link

उत्तर छोड़ें