VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा-

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VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'बस्तियां बस्ती गईं जंगल फ़ना होते गए, लोग पास आते गए लेकिन जुदा होते गए'

प्रोफेसर शहपुर रसूल

News18Hindi

Updated: April 16, 2018, 4:10 PM IST

प्रोफेसर शहपुर रसूल अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं. पेश-ए-नज़र उनके जो अशआर हैं, उसमें शहपुर रसूल ने ज़िक्र किया है अरे से, ओ से, अबे से, जनाब हो गए क्या, अभी तो अच्छे भले से, ख़राब हो गए क्या.

आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में पेश हैं प्रोफेसर शहपुर रसूल के क़लाम.

ख़ुश यक़ीनी में यूं ख़लल आया

कुछ निकलना था, कुछ निकल आयामैंने भी देखने की हद कर दी
वो भी तस्वीर से निकल आया

अरे से, ओ से, अबे से, जनाब हो गए क्या
अभी तो अच्छे भले से, ख़राब हो गए क्या

बस्तियां बस्ती गईं, जंगल फ़ना होते गए
लोग पास आते गए, लेकिन जुदा होते गए

लोग जब सहर-ए-रिया में मुबतला होते गए
जिनको बंदा भी न होना था, ख़ुदा होते गए

 

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