#Love Direct: बेचारा हसबैंड शीशे में खुद को घंटों निहारता होगा कि आखिर बदला क्या है?– News18 हिंदी

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#Love Direct: बेचारा हसबैंड शीशे में खुद को घंटों निहारता होगा कि आखिर बदला क्या है?

रिश्ते

News18Hindi

Updated: May 16, 2018, 4:07 PM IST

“वो पहले जैसे नहीं रहे”, ये वो अलफाज़ हैं जो कि हर शादीशुदा महिला जीवन में एक बार नहीं कई बार दोहराती है. उसने आई लव यू नहीं बोला या नई साड़ी को देखकर भी अनदेखा कर दिया. ऐसी कितनी बातें होती हैं जिनकी ‘आफ्टर’ और ‘बिफोर’ की तस्वीर की तरह तुलना की जाती है. इस परेशानी का शिकार पत्नी से ज्यादा पति बनता है. बेचारा हसबैंड बाथरूम के शीशे में खुद को घंटों निहारता होगा कि आखिर बदला क्या है? इस भावना के दिल में घर करने के बाद रिश्ते में मनमुटाव होने लगता है. हो सकता है ये शिकायत आपको भी अपने पति से हो और इस बात पर आप भी उनसे खफा हों. रिश्ते में कुछ एक्सपेक्टेशन होना लाजमी है, लेकिन इन बातों पर अपने पति को परखने से पहले जरा रूकें और सोचें. हो सकता है आप जो देख रही हों वह बात का केवल एक पहलू हो.

चलिए आपकी शिकायत को जरा अलग नजरिए से समझने की कोशिश करते हैं. आपके साथी की तरफ वाले पहलू को परखते हैं.

पहले जैसा प्यार नहीं करते
यकीन मानिए प्यार कोई मौसम नहीं है कि कल कुछ और आज कुछ और. हां ये हो सकता है कि उसके इजहार का समय न मिल पाए. वे पहले आपको हर बार मिलने आने और जाते समय आई लव यू बोलते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होता. कहते भी हैं तो किसी कस्टमर केयर की लाइन लगती है- ओके, आई लव यू, बाय. पर हो सकता है ये आपकी सोच का फर्क हो. हो सकता है वे किसी ऐसी जगह बैठे हो जहां ये सभी सभ्य न लगे. गौर करें तो पाएंगी कि शायद आप ही आजकल ठीक से इसका जवाब नहीं देती. जी बिलकुल, महिलाएं भी समय के साथ कम रुचि दिखाने लगती हैं.

तुम्हारे पास समय नहीं
ये सवाल एक और सवाल खड़ा करता है वह आप खुदसे पूछिए, क्या वाकई अब आप कम समय बिताते है?  जब आप एक ही घर में रहते है तो यकीनन ज्यादा समय ही बीताते होंगे. ये हो सकता है कि आप पर्सनल समय की बात कर रही हों. लेकिन इसके बाद भी सोचिए पहले क्या रोज मिलते थे? महीने या दो हफ्ते में एक ऐसा दिन होता था, जब उन्हें तमाम काम से छुट्टी लेकर आना होता था. आप चाहे तो शिकायत करने की बजाय उनका ध्यान रख सकती हैं. वो थके-हारे घर आएं तो उनके दिन के बारे में पूछें, बैठकर तसल्ली से साथ खाना खाएं और फिर बाहों का तकिया लगाकर सो जाएं. वे जब आपके साथ तनाव मुक्त महसूस करेंगे तो खुद ही आपके साथ ठहरने के बहाने ढूंढेंगे.

तवज्जों नहीं देते
इस सवाल को पूछने से पहले जरी इसकी गहराई को समझिए. आप ये कहना चाह रही हैं कि जिस महिला के साथ उन्होने पूरा जीवन बीताने की बात कही है वो कोई महत्व नहीं रखती. सुनने में ही अजीब है, जरा खुली आंखों से देखिए. घर की जरूरतें, माता-पिता, दफ्तर और कितनी ही जरूरी बातें होती है जिनका जिम्मा केवल पुरुष ही लेते हैं. जब वे कहते है कि उनके पास ज्यादा जरूरी काम है तो हो सकता है वो सही हों. इस बात से सहमत हो या नहीं लेकिन काम न करने वाला पुरुष समाज में किसी के लिए स्वीकार्य नहीं है. आपके सुख के लिए ये काम बहुत जरूरी है, खासकर आपके पास कुछ समय बैठकर बिताने के लिए.

इन सभी बातों को सोच लेने के बाद खुद से पूछिए क्या सचमुच वो बदल गए हैं ?

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