सुप्रीम कोर्ट| Supreme court, Kanwar

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कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हुई तोड़फोड़ और हिंसक घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले कांवड़ियों के खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली के एक इलाके में कांवड़ियों द्वारा एक कार को नुकसान पहुंचाए जाने को ऐसा अपराध बताया जहां बिना एफआईआर के भी पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह भीड़ द्वारा तोड़फोड़ किए जाने घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा.

इसी हफ्ते बुधवार को दिल्ली के मोती बाग इलाके में कांवड़ियों के एक समूह द्वारा एक कार को तोड़ने-फोड़ने की घटना सामने आई थी. इसके अलावा गुरुवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कांवड़ियों के दो गुटों में हुए विवाद को सुलझाने गई पुलिस पर ही कुछ कांवड़ियों ने हमला बोल दिया था. इस घटना में पुलिस का एक जवान घायल भी हुआ था.

इन मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने 2009 में दिए आदेश को दोहराते हुए कहा कि कोर्ट ने ऐसी यात्राओं की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए थे. साथ ही इन यात्राओं के दौरान होने वाली हिंसक घटनाओं के लिए इनके आयोजकों को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही थी. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इस आदेश का कड़ाई से पालन कराए जाने की जरूरत है.



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