सुप्रीम कोर्ट का फैसला, तलाक के लिए अब नहीं करना होगा 6 महीने इंतजार

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, तलाक के लिए अब नहीं करना होगा 6 महीने इंतजार

हिंदू मैरिज एक्ट के तहत सहमति से तलाक के मामले में पहले और आखिरी मोशन के बीच अभी 6 महीने का वक्त दिया जाता है.

News18Hindi

Updated: September 13, 2017, 12:11 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जब हिंदू पति-पत्नी के बीच रिश्ते सुधरने की जरा भी गुंजाइश न रह जाए तो दोनों की आपसी सहमति से तुरंत तलाक की इजाजत दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के एक मामले में चल रही सुनवाई में फैसला सुनाया कि शादीशुदा जोड़ा आपसी सहमति से अलग होना चाहते हैं तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ के छह महीनों के प्रावधान में छूट देनी चाहिए.

अभी ये है नियम
हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत सहमति से तलाक के मामले में पहले और आखिरी मोशन के बीच 6 महीने का वक्त दिया जाता है, इसे ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ कहा जाता था. कूलिंग पीरियड के बाद भी अगर पति पत्नी राजी नहीं होते थे तो उन दोनों के बीच तलाक हो जाता था.

8 साल से एक अलग रह रहे दंपत्ति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणीदिल्ली के एक दंपत्ति ने कोर्ट में दलील दी कि वे कई सालों से एक दूसरे से अलग रहे हैं. ऐसे में उन दोनों के साथ आने की कोई गुंजाइश नहीं है, जिससे आपसी सहमति से तलाक के मामले में छह महीने के वेटिंग पीरियड को कम किया जाए. जज आदर्श कुमार गोयल और यूयू ललित की बेंच ने छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड की कानूनी बाध्यता को हटाते हुए कहा कि उद्देश्य विहीन शादी को लंबा खींचने और दोनों पक्षों की पीड़ा बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है.

इसके बिना नहीं मिलेगी ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ से आजादी
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में साफ किया है की दंपत्ति को ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ से तभी आजादी मिलेगी जब दोनों पार्टी में तमाम सिविल और क्रिमिनल मामले में समझौता, गुजारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी तय हो गई हो. ऐसी स्थिति में पहले मोशन के 7 दिनों के बाद दोनों पक्ष वेटिंग पीरियड को खत्म करने की अर्जी के साथ सेकंड मोशन दाखिल कर सकते हैं.

अभी ये है मौजूदा हिंदू मैरिज एक्ट
हिंदू मैरिज एक्ट 1955 में धारा13 (बी) में प्रावधान है कि तलाक के लिए पहला मोशन जब दाखिल किया जाता है तो दोनों पक्ष कोर्ट को बताता है कि दोनों में समझौते की गुंजाइश नहीं है और दोनों तलाक चाहते हैं.

याचिका में दोनों समझौते की तमाम शर्तों को लिखते हैं साथ ही बताते हैं कि कितना गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी किसके पास है. जिसके बाद कोर्ट तमाम बातों को रिकॉर्ड पर लेती है और दोनों से बाद की डेट्स देती है. इस दौरान उन्हें इसलिए समय दिया जाता है कि वह समझौता कर सकें. अगर गुस्से में ये सब हुआ है तो गुस्सा शांत होने के बाद दोनों साथ रहने को तैयार हो जाएं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो 6 महीने से लेकर 18 वें महीने के बीच दोनों सेकंड मोशन के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दोबारा से तलाक के लिए कहेंगे और कोर्ट को बताएंगे कि समझौता नहीं हुआ और वे तलाक चाहते हैं और तब कोर्ट तलाक का निर्णय कर देती है.

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First published: September 13, 2017



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