राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में क्या नियमों का उल्लंघन कर दाखिले दिए जा रहे हैं?

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राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में क्या नियमाें का उल्लंघन कर दाखिले दिए जा रहे हैं? यह सवाल हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के बाद उठा है. इसमें बताया गया है कि कई मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान तमाम तरह की अनियमितताएं बरती जा रही हैं.

अख़बार के मुताबिक कई मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के आख़िरी दौर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय नियम-मापदंडों का पालन नहीं किया गया है. उदाहरण के लिए बिहार में दाखिले के लिए आख़िरी दौर की काउंसलिंग 31 अगस्त को शाम पांच बजे शुरू हुई. उसी दिन कॉलेजों में प्रवेश के लिए आख़िरी तारीख़ भी थी. काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों से उस कॉलेज के नाम 10 लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) जमा कराने के लिए कहा गया जिसमें वे प्रवेश लेना चाहते हैं.

अभिभावकों का आरोप है कि यह शर्त जानबूझकर रखी गई ताकि पहले से तय अन्य उम्मीदवारों को दाख़िला दिलाया जा सके. चूंकि शाम पांच बजे के बाद कोई बैंक खुला नहीं मिला इसलिए कई उम्मीदवार डीडी नहीं दे पाए. पर जिन उम्मीदवारों को दलालों के ज़रिए पहले ही इस बारे में पता था और वे डीडी लेकर काउंसलिंग में पहुंचे और उन्हें एडमिशन मिल गया. इसी तरह की अनियमितताएं कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पुड्‌डुचेरी और पंजाब में भी सामने आई हैं.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले दीपक कुमार गुप्ता भी ऐसी ही शिकायत करते हैं. उनके मुताबिक, ‘मुझे कर्नाटक के अधिकारियों ने चार सितंबर को रात 11 बजे मोबाइल पर संदेश भेजा. इसमें अगले दिन सुबह 11 बजे काउंसलिंग के लिए बेंगलुरू आने को कहा गया था. मैं लखनऊ से फ्लाइट पकड़कर सुबह 10 बजे वहां पहुंच भी गया. लेकिन अफसरों ने मेरी अर्ज़ी ख़ारिज़ कर दी क्योंकि मेरे पास डीडी नहीं था. मैंने उनसे कुछ वक़्त मांगा ताकि ऑनलाइन ट्रांसफर के ज़रिए पैसे मंगा सकूं लेकिन मेरा आग्रह नामंज़ूर कर दिया गया.’

सूत्रों के मुताबिक इस तरह की मांगें इसलिए रखी जा रही हैं ताकि मैरिट लिस्ट में नीचे क्रम पर आए बच्चों को नियमविरुद्ध दाख़िला दिया जा सके. इस तरह राज्यों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मापदंडों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. कोर्ट ने देश के करीब 474 मेडिकल कॉलेजों की 60,000 सीटों पर नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) के ज़रिए प्रवेश दिए जाने की व्यवस्था की थी. अदालत के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी उम्मीदवार को नीट में मिली रैंकिंग के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया के ज़रिए विभिन्न कॉलेजों में दाख़िला दिए जाने का प्रावधान है.



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