पश्‍चिमी यूपी में सपा को दलित-मुस्‍लिम गठजोड़ पर है भरोसा, चला है ये कार्ड

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पश्‍चिमी यूपी में सपा को दलित-मुस्‍लिम गठजोड़ पर है भरोसा, चला है ये कार्ड

मुस्‍लिम-यादव एमवाई फार्मूले से बाहर आते हुए सपा ने इस बार पश्‍चिमी उप्र में एक नया कार्ड चला है. पहली सूची में सपा ने दलित-मुस्‍लिमों पर भरोसा जताते हुए उन्‍हें सबसे ज्‍यादा टिकट दिए हैं. जबकि इस क्षेत्र में जाट-मुस्‍लिम समीकरण को जीत का अधार माना जाता है.

नासिर हुसैन

नासिर हुसैन

| News18India.com

Updated: January 21, 2017, 8:12 PM IST

मुस्‍लिम-यादव एमवाई फार्मूले से बाहर आते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस बार पश्‍चिमी उप्र में एक नया कार्ड चला है. पहली सूची में सपा ने दलित-मुस्‍लिमों पर भरोसा जताते हुए उन्‍हें सबसे ज्‍यादा टिकट दिए हैं. जबकि इस क्षेत्र में जाट-मुस्‍लिम समीकरण को जीत का अधार माना जाता है. लेकिन सपा के इस कार्ड ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सहित दूसरी पार्टियों में खलबली मचा दी है. वहीं सियासत के जानकार इसे मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बदले माहौल में सपा का नया प्रयोग बता रहे हैं.

खासतौर से पश्‍चिमी यूपी को ध्‍यान में रखते हुए सपा 209 उम्‍मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है. लेकिन सूची खासी चौंकाने वाली है. क्षेत्र के हिसाब से सपा ने दलित-मुस्‍लिमों पर दांव खेला है. सूची में 56 मुस्‍लिम तो 39 दलितों को टिकट दी गई है. सपा की सूची पर सियासी जानकार बताते हैं कि क्षेत्र के हिसाब से होना तो ये चाहिए था कि मुस्‍लिमों संग जाट समीकरण पर रणनीति तय की जाती.

लेकिन सपा की इस चाल ने दूसरे दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. राजनीति विश्‍लेषक डॉ. मोहम्‍मद अरशद बताते हैं कि 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से जाट और मुस्‍लिम गठजोड़ पर कोई भी रणनीति तैयार करना खुदकुशी करने जैसा हो सकता है. और फिर दूसरी पार्टियों का पूरा ध्‍यान होगा कि किसी भी तरह से जाट-मुस्‍लिम गठजोड़ को न बनने दिया जाए. इसी को ध्‍यान में रखकर सपा ने जोखिम लेते हुए ये कदम उठाया है.
cast 11 mus dalitनोट-जिलेवार सपा के उम्‍मीदवार और जाति के आंकड़े।
इस क्षेत्र में एमवाई फैक्‍टर पर काम न करने का सपा का दूसरा कारण ये भी है कि यादवों की संख्‍या दलित-मुस्‍लिमों के मुकाबले यहां बहुत कम है. अब अगर बात करें जाट बिरादरी की तो 2013 के बाद से अभी तक जाट-मुस्‍लिम के बीच की खाइयां पटी नहीं हैं. खासतौर से सपा के लिए दोनों ही समुदाय को साथ लेकर चलना उसके मुस्‍लिम वोटर को नाराज भी कर सकता था. सपा के इस प्रयोग से सबसे ज्‍यादा धक्‍का बसपा को लगा है. जिस कार्ड को सपा पहली बार खेल रही है उस कार्ड पर बसपा हमेशा से चुनाव लड़ती आई है. इसलिए ये और भी बसपा के लिए खतरे की घंटी हो जाती है.



First published: January 21, 2017



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