टेस्ट में स्पिन से कांपने वाले कंगारुओं को वनडे में क्यों नहीं लगता है डर?

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टेस्ट में स्पिन से कांपने वाले कंगारुओं को वनडे में क्यों नहीं लगता है डर?

(Getty images)

News18Hindi

Updated: September 12, 2017, 5:36 PM IST

भारत में खेली जाने वाली किसी भी टेस्ट सीरीज से पहले सबसे ज्यादा चर्चा पिचों की और इसके स्पिन गेंदबाजों को लेकर होती है. लेकिन, वन-डे क्रिकेट में ये कहानी बिल्कुल ही बदल जाती है. आखिर ऐसा होता क्यों हैं? अब आप खुद सोचिये कि वन-डे सीरीज़ के लिए टीम इंडिया ने अपने सबसे कामयाब दो स्पिनर को टीम में ही शामिल नहीं किया है.

ऑस्ट्रेलिया ने पिछले चार वर्षों में भारतीय सरजमीं पर दो टेस्ट सीरीज खेली लेकिन आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और बायें हाथ के स्पिनर रविंद्र जडेजा के सामने उसके बल्लेबाज नाकाम रहे और भारत ने ये दोनों सीरीज आसानी से जीती. अश्विन ने इस बीच आठ मैचों में 50 और जडेजा ने इतने ही मैचों में 49 विकेट लिये. इन दोनों से पहले हरभजन सिंह (14 मैचों में 86 विकेट) और अनिल कुंबले (दस मैचों में 62 विकेट) भी अपनी धरती पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ खासे सफल रहे हैं.

एकदिवसीय मैचों में एकदम से कहानी बदलती रही. यही वजह है कि 2013 में अश्विन और जडेजा की मौजूदगी के बावजूद भारत सात मैचों की सीरीज बमुश्किल 3-2 से जीत पाया था. टेस्ट मैचों में कहर बरपाने वाले अश्विन ने उस सीरीज के छह मैचों में 37.22 की औसत से नौ और जडेजा ने इतने ही मैचों में 41.87 की औसत से आठ विकेट लिये थे. लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने भी तब एक मैच खेला था जिसमें उन्होंने दस ओवर में 78 रन लुटाये थे और उन्हें सफलता नहीं मिली थी.

भज्जी-कुंबले भी रहे नाकामइससे पहले हरभजन (22 मैचों में 54.94 की औसत से 18 विकेट) और कुंबले (9 मैचों में 13 विकेट) भी एकदिवसीय मैचों में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को टेस्ट मैचों की तरह परेशान नहीं कर पाये थे. इसके उलट तेज गेंदबाज ज्यादा प्रभावी रहे. इन दोनों टीमों के बीच भारतीय सरजमीं पर खेली गयी पिछली सीरीज में ही आर विनय कुमार, मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार और इशांत शर्मा ने मिलकर 19 विकेट लिये थे. शायद यही वजह है कि भारतीय टीम प्रबंधन ने आगामी सीरीज के पहले तीन वनडे के लिये अपना तेज गेंदबाजी आक्रमण मजबूत रखा है.

पेसर ही होते हैं सफल
भारत ने इन मैचों के लिये शमी और भुवनेश्वर के अलावा उमेश यादव, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या के रूप में कुल पांच तेज गेंदबाज टीम में रखे हैं जबकि स्पिन विभाग में अश्विन और जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाजों के बजाय युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव जैसे युवा स्पिनरों पर भरोसा जताया है. आंकड़े भी इसके गवाह हैं. इससे पहले जहीर खान (19 विकेट), अजित अगरकर (17 विकेट), जवागल श्रीनाथ और कपिल देव (दोनों 12 विकेट) तथा एस श्रीसंत (11 विकेट) ने वनडे में स्पिनरों की तुलना में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर अधिक प्रभाव छोड़ा.



First published: September 12, 2017



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