जानें इस बार क्यों बदल गई मकर संक्रांति की तारीख!

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जानें इस बार क्यों बदल गई मकर संक्रांति की तारीख!

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News18India.com

Updated: January 15, 2016, 7:21 AM IST

नई दिल्ली।एक ओर जहां हरिद्वार में अर्ध्य कुंभ की शुरुआत हो चुकी है और श्रद्धालु इस पावन अवसर पर गंगा जी में डुबकी लगाने आ रहे हैं। वहीं 15 तारीख को मकर संक्रांति है। वैसे तो मकर संक्रांति हर बार 14 तारीख को होती है लेकिन इस बार ये 15 जनवरी को हो रही है। हरिद्वार का पवित्र तट और अर्धकुंभ का पावन पर्व के मौके पर जो गंगा में स्नान कर लेता है उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है और मोक्ष की ये आस तब और भी मजबूत हो जाती है जब आती है मकर संक्रांति की तिथि।

होली-दिवाली-दश्हरा-जन्माष्टमी जैसे सभी त्यौहार चंद्रमा की गति के मुताबिक मनाए जाते हैं सिर्फ मकर संक्रांति ऐसा त्यौहार है जिसका निर्धारण सूर्य की गति से होता है। यही वजह से कि लोग इस पावन अवसर पर स्नान को ज्यादा महत्व देते हैं। संक्रांति पर लोग पवित्र स्नान ही नहीं करते हैं, खिचड़ी-तिल गुड़ के पकवान और पतंगबाजी का भी एक अलग रंग इस मौके पर नजर आता है। मकर संक्रांति के इस रंग में सबसे विशेष रंग है हरिद्वार में हो रहा पवित्र स्नान। हरिद्वार में 14 जनवरी से अर्धकुंभ शुरु हो चुका है जिसकी वजह से पवित्र स्नान के लिए लाखों लोग संगम तट पर आ चुके हैं।

आमतौर पर मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर होता है। जो हर साल 14 जनवरी के दिन पड़ती है लेकिन पिछले 3 सालों से यह ग्रह की चालों की वजह से 15 तारीख को पड़ रही है। दरअसल 14 जनवरी को सूर्य रात 1.26 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा जबकि पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्य उदय से शाम 5.26 बजे तक होगा। संक्रांति का पुण्यकाल 18 घंटे का होगा और पुण्यकाल में ही संक्रांति मनाई जाती है।

मकर संक्रांति के पौराणिक महत्व की बात करें तो महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से मृत्यु शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही प्राण छोड़ने का संकल्प लिया था। मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाता है, लिहाजा, मोक्ष पाने का ही नहीं बल्कि मन और इंदि्रयों पर अंकुश लगाने का पर्व भी है मकर संक्रांति।मकर संक्रांति के स्नान और उससे जुड़ी परंपराओं का धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी है। आम तौर पर जनवरी में कड़ाके की ठंड में लोग पानी से दूर होने लगते हैं, लेकिन मकर संक्रांति पर स्नान जरूर करने की परंपरा से साफ-सफाई की आदत को बढ़ावा मिलता है। गुड और तिल का इस्तेमाल से ठंड में होने वाली एसिडिटी और अपच से भी आराम मिलता है।



First published: January 15, 2016



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