घर खरीदारों के लिये बॉम्बे हाइकोर्ट का यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है

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देशभर के घर खरीदारों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने कहा है कि रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवेलपमेंट ऐक्ट (रेरा) मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होगा. हाई कोर्ट ने रेरा की संवैधानिक वैधता को भी बरकरार रखा है. यह कानून घर खरीदने वालों के अधिकारों की रक्षा करता है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कोर्ट ने बिल्डरों को भी राहत दी है. उसने कहा है कि बिल्डर विशेष मामलों में किसी प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में और समय ले सकते हैं. यह अतिरिक्त समय हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर दिया जाएगा. न्यायमूर्ति नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति आरजी केतकर की बेंच ने अलग-अलग लेकिन एक जैसे फैसले सुनाते हुए कहा कि पंजीकरण के समय प्रोजेक्ट्स के प्रमोटर की ओर से दी जाने वाली डेडलाइन में एक साल की छूट दी जाएगी.

रेरा के सेक्शन-3 को लेकर बिल्डरों को विशेष आपत्ति है. इसके तहत न सिर्फ नए बल्कि निर्माणीधीन प्रोजेक्ट्स के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया गया है, जबकि उनका समापन प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) अगले साल एक मई तक मिलना है. बिल्डरों का कहना है कि इसकी वजह से उन्हें पहले के प्रोजेक्ट्स में हुई देरी को लेकर भरपाई के लिए उत्तरदायी बनाया जा रहा है. बिल्डरों ने रेरा के कुछ विशेष प्रावधानों को भी समाप्त करने की बात कही. इनमें घर खरीदारों से मिली रकम के 70 प्रतिशत हिस्से को अलग से जमा करके रखना, वाजिब कारणों के बावजूद प्रॉजेक्ट की डेडलाइन को एक साल से ज्यादा नहीं बढ़ाना और पहले के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा नहीं करने पर खरीदार को हर्जाना देने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं.

कई राज्यों के बिल्डरों की तरफ से वहां के हाई कोर्टों में रेरा को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की गई हैं. इस साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने रेरा पर बिल्डरों की आपत्तियों पर सुनवाई की जिम्मेदारी बॉम्बे हाई कोर्ट को दी थी. सर्वोच्च अदालत ने दूसरे हाई कोर्टों की सुनवाइयों पर रोक लगाकर बॉम्बे हाई कोर्ट को जिम्मेदारी थी कि वह इस मामले में कोई रास्ता बनाए. बुधवार को दिए गए आदेश को इस मामले के तहत पहला फैसला बताया जा रहा है. इसके बाद तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के घर खरीदार भी सरकार के उन नियमों को चुनौती दे सकेंगे जिनमें प्रोजेक्ट्स में देरी होने पर बिल्डरों को राहत दी गई थी. सरकारों ने देरी से चल रहे तमाम प्रोजेक्ट्स को रेरा से बाहर कर दिया था. इससे बिल्डरों को राहत मिली थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा.



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