गठजोड़ के गणित से यूपी में कांग्रेस को कितना फायदा, क्‍या है मजबूरी?

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गठजोड़ के गणित से यूपी में कांग्रेस को कितना फायदा, क्‍या है मजबूरी?

अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने आखिर गठबंधन के सियासी रिश्‍ते से नफे का क्‍या गणित लगाया है. क्‍या इस गठजोड़ से भाजपा और बसपा को रोका जा सकता है?

ओम प्रकाश

ओम प्रकाश

| News18India.com

Updated: January 20, 2017, 12:14 PM IST

समाजवादी पार्टी उत्‍तर प्रदेश में बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस 27 साल से सत्‍ता से दूर है. ऐसे में गठजोड़ से कांग्रेस को कितना फायदा मिलेगा. अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने आखिर अपनी पार्टी के लिए इस सियासी रिश्‍ते के नफे का क्‍या गणित लगाया है. क्‍या इस गठजोड़ से भाजपा और बसपा को रोका जा सकता है? सियासी जानकार बताते हैं सपा, बसपा से पहले मुस्‍लिम वोट कांग्रेस को मिलता रहा है. ऐसे में गठबंधन से यादव-मुस्‍लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो जाएगा. इससे मुस्‍लिम वोटरों का असमंजस खत्‍म होगा और उसे बीजेपी के खिलाफ अपने दो पसंदीदा दलों का विकल्‍प मिलेगा.

मायावती मुस्‍लिम वोटरों को अपने पक्ष में करने की लगातार कोशिश कर रही हैं. इसीलिए उन्‍होंने 403 में से 97 सीटों पर मुसलमान प्रत्याशियों को उतारा है. इस समय यूपी में 19 फीसदी मुस्‍लिम हैं. यादव, ग्‍वाला व अहीर मिलाकर 19.40 फीसदी बताए गए हैं. जानकार बता रहे हैं ये वोट एकत्र हो जाएं तो फिर सपा-कांग्रेस भाजपा को रोकने में कामयाब हो सकते हैं. वर्ष 2012 में सपा ने 29.13% फीसदी वोट लेकर सरकार बना ली थी.

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सेंटर फॉर द स्‍टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्‍स, कानपुर के प्रोफेसर एके वर्मा के मुताबिक 2012 में लगभग 60 फीसदी मुस्‍लिम समाजवादी पार्टी के साथ थे. सपा में चल रहे अंतकर्लह की वजह से वह असमंजस में थे. लेकिन अब मामला शांत हो गया है. पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ करीब 18 फीसदी मुस्‍लिम थे।muslim voter

बताया गया है कि आरएलडी से बात खत्‍म होने के बाद सपा कांग्रेस को गठबंधन में 100 सीटें दे सकती है. जानकारों का कहना है कि गठबंधन के बाद कांग्रेस का सक्‍सेस रेट अच्‍छा रहा है, इसलिए कांग्रेस इसमें अपना ज्‍यादा फायदा देख रही है. इस बार मुलायम सिंह यादव की छाया से अलग होकर अखिलेश यादव को चुनाव में अपनी सियासी समझ और कामकाज का प्रदर्शन करना है. ऐसे में किसी न किसी दल का सहारा अखिलेश को भी चाहिए.

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जानकार बता रहे हैं कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आरजेडी, जेडीयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. 41 सीटों पर चुनाव लड़कर उसने 27 सीटें हासिल कीं. यूपी में भी उसे इसी तरह फायदा दिखाई दे रहा है. यूपी में पिछले छह विधानसभा चुनाव से कांग्रेस किसी साल 50 सीट भी नहीं जीत सकी है.

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2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं. उसने राष्‍ट्रीय लोकदल के साथ चुनाव लड़ा था. वर्मा बताते हैं कि यूपी में कांग्रेस को जीवित रहने के लिए गठबंधन जरूरी हो गया है. 2007 के मुकाबले 2012 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत गठबंधन की वजह से ही करीब तीन फीसदी बढ़ गया था.



First published: January 20, 2017



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