खुदरा महंगाई दर की बढ़कर 5.21 फीसदी पर पहुंची

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खुदरा महंगाई की दर 5.21 फीसदी पर पहुंच गई है. बीते 17 महीनों में यह इसका उच्चतम स्तर पर है. कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2017 में खुदरा महंगाई दर 4.88 प्रतिशत थी.

महंगाई में हुई इस वृद्धि की बड़ी वजह खाद्य पदार्थों के साथ तेल के दामों में हुआ इजाफा है. पिछले साल के नवंबर और दिसंबर महीनों की तुलना करें तो सिर्फ दाल के दामों में 0.6 फीसदी की मामूली गिरावट हुई जबकि सब्जियों के दामों में नवंबर के 22.48 प्रतिशत के मुकाबले दिसंबर में 29.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. सब्जियों के अलावा, अंडों और फलों के दामों में भी तेजी दर्ज हुई. नवंबर 2017 में खाद्य महंगाई दर का आंकड़ा 4.42 फीसदी से बढ़कर दिसंबर में 4.96 प्रतिशत जा पहुंचा.

रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2017-18 की आखिरी तिमाही में खुदरा महंगाई की दर 4.3 से 4.7 प्रतिशत के बीच रहेगी. लेकिन दिसंबर 2017 के आंकड़े कुछ और ही संकेत दे रहे हैं. अगर खुदरा महंगाई नियंत्रित नहीं हो पाती तो आरबीआई को निकट भविष्य में अपनी प्र​मुख दरों में वृद्धि करनी पड़ सकती है. ऐसे में सस्ते लोन का सपना देख रहे लोगों को निराशा का सामना करना पड़ सकता है.

दूसरी तरफ, औद्योगिक उत्पादन दर (आईआईपी) में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है. अक्टूबर 2017 में यह दर 2.2 फीसदी की थी जो कि नवंबर में ऊंची छलांग लगाते हुए 8.4 प्रतिशत पर आ गई है. नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद बीते 25 महीनों में यह पहला मौका है जब आईआईपी में इतनी शानदार वृद्धि देखने को मिली है.



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