अब ताजमहल के भीतर मकबरे को देखने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी

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एक अप्रैल से विश्व धरोहर ताजमहल को देखने के लिए पर्यटकों को अपनी जेबें ढीली करनी पड़ेगी. केंद्र सरकार ने न केवल प्रवेश शुल्क 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया है, बल्कि ताजमहल के भीतर मकबरे को देखने के लिए भी 200 रुपये का अलग से टिकट लगा दिया है. अभी तक मकबरे के लिए कोई टिकट नहीं लगता था. मंगलवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि यह कदम ताजमहल को ‘संरक्षित’ करने और भीड़ के नियंत्रण के लिए उठाया गया है. नए बदलाव के तहत ताजमहल देखने का समय भी तय कर दिया है. इसके तहत पर्यटकों को बारकोड वाले टिकट मिलेंगे जो केवल तीन घंटे के लिए मान्य होंगे.

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के मुताबिक राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग शोध संस्थान (नीरी) ने हालिया शोध में ताजमहल में पर्यटकों की संख्या सीमित करने की सिफारिश की है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से चार हफ्ते में ताजमहल के संरक्षण का खाका मांगा है. इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हमने सोचा कि पर्यटकों की संख्या सीमित करना सही कदम नहीं होगा, लेकिन कुछ तो करना होगा.’ महेश शर्मा ने आगे कहा कि प्रवेश शुल्क बढ़ाने और मकबरे के लिए अलग से टिकट लगाने का मकसद राजस्व जुटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तव में दिलचस्पी रखने वाले ही यहां आएं. ताजमहल को देखने रोजाना 30 से 40 हजार लोग आते हैं. यह संख्या छुट्टियों के दिनों में एक लाख तक पहुंच जाती है.

ताजमहल में विदेशी पर्यटकों के लिए सहूलियत को बढ़ाया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि विदेशी पर्यटकों के लिए अलग से कतार और शौचालय के इंतजाम के अलावा आगरा रेलवे स्टेशन से ताजमहल तक विशेष गलियारा भी बनाया जाएगा. उनके मुताबिक अधिकारियों को यहां आने वाले पर्यटकों को खरीदारी या होटलों में ठहरने के लिए परेशान करने वालों (लपका) के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.



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